Wednesday, October 29, 2008

मुंह की बात सुने हर कोई

मुंह की बात सुने हर कोई,
दिल के दर्द को जाने कौन,
आवाज़ों के बाज़ारों में,
ख़ामोशी पहचाने कौन.

शदियों शदियों वही तमाशा,
रस्ता रस्ता लम्बी खोज,
लेकिन जब हम मिलजाते हैं,
खो जाता है, जाने कौन.

वो मेरा आईना है,
और मैं उसकी परछाई हूं,
मेरे ही घर में रहता है,
मुझ जैसा ही जाने कौन.

किरण किरण अलसाता सुरज,
पलक पलक खुलती नींदें,
धीरे धीरे बिखर रहा है,
ज़र्रा ज़र्रा जाने कौन.

मुंह की बात सुने हर कोई,
दिल के दर्द को जाने कौन,
आव़ाज़ों के बाज़ारों में,
ख़ामोशी पहचाने कौन.


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